Tuesday, August 18, 2020

Drug free

देवता भी मनुष्य जीवन को तरसते हैं क्योंकि मोक्ष मनुष्य जीवन में ही हो सकता है।

और परमात्मा का विधान है कोई भी नशा करने वाला मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता और आप इस अनमोल जीवन को शराब पीने में बर्बाद कर रहे हो।

drug administration
 drug interaction 


शराबी व्यक्ति विचार करें

आज किसी की भी संतान उस समय बहुत गर्व महसूस करती है जब उसे अपने स्वावलंबी पिता का परिचय देना हो।

शराबी परिजन का परिचय देने में बच्चे हीन भावना का शिकार होते हैं।

drug interaction
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Tuesday, July 14, 2020

Side effect of bollywood





Bollywood:दुष्प्रभाव और बचाव


आजकल हमारे समाज पर बॉलीवुड का इतना ज्यादा असर हो रहा है कि वह अपनी मान-मर्यादा तक भूल गया पहले हमारे समाज में महिलाएं और बच्चे और बड़े सभी पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनते थे लेकिन आजकल बॉलीवुड के दुष्प्रभाव के कारण छोटे-छोटे कपड़े पहनते हैं जिससे पूरा शरीर नहीं ढकता है।बॉलीवुड के कारण सभी के अंदर पश्चिमी संस्कृति समा गई है जो कि हमारे समाज के लिए बहुत ही हानिकारक है।
Bollywood
 bollywood 2020 

फिल्मों में दिखाए गए दुर्व्यवहार से लोगों के बीच आपसी भाईचारा खत्म होता जा रहा है। फिल्मों में जो एक्टर या हीरो होता है वह खुद ही नशा करता हुआ दिखाया जाता है जिससे लोग उनसे प्रेरणा लेकर नशे के आदी होते जा रहे हैं इससे भी हमारे समाज को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है बहुत सारे लोग फिल्मों की वजह से नशे के आदी हो गए हैं। चाह कर भी उनसे अब नशा नहीं छूट रहा है और फिल्मों को देखकर लोग नए-नए चोरी-लूट के तरीके अपनाते हैं और साथ ही समाज मे बलात्कार जैसी घटनाएं भी फिल्मों की ही देन है।इस प्रकार फिल्मों की वजह से समाज को एक बड़ी क्षति पहुंची है
Side effect of bollywood
 Bollywood Movies 

बॉलीवुड से हो रही हानि से बचने का केवल एक ही तरीका है "पूर्ण संत का सत्संग" जी हां आज के समय में पूर्ण संत केवल संत रामपाल जी महाराज ही है जो सदैव शास्त्रों के अनुसार विधिवत साधना बताते हैं।संत रामपाल जी महाराज सत्संग में बताते हैं कि चोरी लूट आदि करने से आगे हमें बहुत ही बड़ा कष्ट उठाना पड़ता है। संत रामपाल जी महाराज अपने सत्संग में फिल्मों से फैले दुर्व्यवहार के बारे में बताकर लोगो को जागरूक कर रहे है।संत रामपाल जी महाराज अपने अनुयायियों को फिल्में देखने से भी मना करते हैं उनका एक भी अनुयाई फिल्म नहीं देखता है जिससे उनमें बुराइयां और दुर्व्यवहार घर नहीं करता है।
Bollywood Movies
disadvantages of bollywood


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Wednesday, July 8, 2020

Mobile: Advantages and Disadvantages

                 मोबाइल के फायदे और नुकसान

आजकल मोबाइल हम सबके लिए बहुत ही उपयोगी है क्योंकि यह विश्व के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से बात करवा देता है और रिश्तेदारों और मित्रों के बीच बातचीत के द्वारा समन्वय रखता है। आजकल एंड्राइड मोबाइल सभी युवा वर्ग के लोग रखते हैं।एंड्राइड मोबाइल बहुत ही उपयोगी होता है। इससे घर बैठे हम ऑनलाइन क्लास भी ले सकते हैं,कोई भी ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं और पढ़ाई से संबंधित कोई भी जानकारी जुटा सकते है।आजकल एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए मोबाइल में उपस्थित गूगल मैप आदि का काफी उपयोग किया जाता है जो कि बिल्कुल सही रास्ता बताता है।इस तरह आज के आधुनिक युग में मोबाइल की बहुत ही जरूरत पड़ती है।
Mobile phone
 android mobile 


एक तरफ मोबाइल के फायदे के साथ-साथ दूसरी तरफ मोबाइल का नुकसान भी होता है।आजकल के युवा मोबाइल से इस कदर चिपके रहते हैं कि वह अपनी आंखों की रोशनी तक भी खो बैठते हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी मोबाइल में वीडियो गेम कार्टून आदि सब चीजों के चिपके रहते हैं जो की बहुत ही हानिकारक है क्योंकि इससे बच्चों की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक क्षमता पर भी काफी असर पड़ता है।पुराने समय में हम देखते हैं थे कि बच्चे बाहर गलियों में खेला करते थे जिससे उनकी शारीरिक क्षमता काफी अच्छी होती थी लेकिन आजकल छोटे-छोटे बच्चे मोबाइल से चिपके रहते हैं जिससे उनको शारीरिक हानि पहुंच रही है और युवा वर्ग सोशल मीडिया पर इतना ज्यादा एक्टिव हो गया है कि वह अपने घर परिवार की तरफ भी ध्यान नहीं दे पाता है।
Mobile phone
 Disadvantages of mobile 


इस तरह मोबाइल के फायदे और नुकसान दोनों ही है। मोबाइल से हम भगवान का प्रचार भी कर सकते हैं आजकल संत रामपाल जी महाराज  के शिष्य मोबाइल से सत भक्ति का प्रचार कर रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज संपूर्ण विश्व में एकमात्र ऐसे संत हैं जो शास्त्रों के अनुकूल साधना बताते है और उनके शिष्य सोशल मीडिया के माध्यम से सभी जगह शास्त्र अनुकूल भक्ति करने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। शास्त्र अनुकूल भक्ति करने से मोक्ष के साथ-साथ समाज में व्याप्त बुराइयां जैसे नशा,दहेज प्रथा,बाल विवाह अन्य सभी प्रकार की कुरुतिया दूर हो रही है। यह मोबाइल का सबसे बड़ा उपयोग है कि सन्त रामपाल जी महाराज के अनुयायी अपना कल्याण करवाने के साथ-साथ दूसरों का कल्याण भी करवा रहे हैं। सत भक्ति करने से कैंसर जैसे असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं।
phone use
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Tuesday, June 30, 2020

Environmental benefits

                        पर्यावरण:-हमारा जीवन

पर्यावरण जिसका अर्थ होता है चारो और का आवरण अर्थात हमारे जो चारो और का आवरण है उसे ही पर्यावरण कहते हैं।
जीवन के लिए पर्यावरण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। हमारे पर्यावरण में ऑक्सीजन,नाइट्रोजन,कार्बन डाइ-ऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड आदि कई अन्य गैस होती है जो जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी है। ऑक्सीजन मानव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तो वही  कार्बन डाइऑक्साइड पेड़ पौधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और नाइट्रोजन हमारे खेतों की फसलों के लिए अत्यंत आवश्यक है और न जाने कितनी गैस होती है जो किसी ना किसी काम में आती है। इस तरह यह सभी पर्यावरण में ही मौजूद होते हैं।
Environmental use
 Environmental use 


लेकिन आजकल मानव अपने फायदे के लिए पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रहा है जंगल के जंगल नष्ट किये जा रहे हैं। कटते पेड़ों के कारण बारिश की कमी हो रही है जिससे ताल-सरोवर सूख रहे हैं जो कि हमारे लिए अत्यंत दुख की बात है। आज जंगलों से पेड़-पौधों को काटकर औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है जिससे पर्यावरण को काफी ज्यादा क्षति हो रही है।
औद्योगिक क्षेत्रों का कचरा,बढ़ते वाहनों से निकलने वाला धुआं आदि से जल प्रदूषण,वायु प्रदूषण की स्थिति काफी ज्यादा बढ़ रही है।
Environmental damage
Environment friend


शास्त्र अनुकूल साधना करने से पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकता है। आज के समय में संत रामपाल जी महाराज ही शास्त्रों के अनुकूल साधना करवा रहे हैं जिसमें वह अपने अनुयायियों से पाँच यज्ञ करवाते हैं जिनमें एक ज्योति हवन यज्ञ होता है जो कि पर्यावरण के लिए काफी लाभदायक है इसमें उनके सभी अनुयाई अपने घरों में सुबह-शाम देशी घी से ज्योति प्रज्वलित करते हैं जिससे पर्यावरण को काफी मजबूती प्रधान होती है और ओजोन परत भी काफी मजबूत बनती है।
Environment protection
 Environment protection 

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Wednesday, June 24, 2020

Guru is like God

            आखिर क्यों गुरु को भगवान माना जाए?
गुरु के बारे में कबीर साहेब अपनी वाणी में इस तरह बताते हैं-
                 कबीर
                 गुरु गोविंद दोनो खड़े किसके लागू पाय।
                 बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय।।
अथार्त-
स्वयं पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ने सतगुरु की महिमा बताते हुए कहा है की सतगुरु वह है जिसने सत भक्ति के द्वारा हमें पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति व मोक्ष का मार्ग बताया ।वह हमारे लिए भगवान  से भी ज्यादा आदरणीय है।


Guru is god
Guru is god



कबीर साहेब अपनी दूसरी वाली में लिखते हैं कि-

          कबीर-
               सात समुद्र की मसी करू, लेखनी करू वनराय।
               सब धरती कागज करू गुरु गुण लिखा न जाय।।
अथार्त-
कबीर साहेब अपनी वाणी में कहते हैं कि सात समुद्र की स्याही बना लो और संपूर्ण धरती के पेड़ पौधों की कलम बना लो और पूरी धरती को कागज बना लो फिर भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते हैं अर्थात कबीर साहिब जी गुरु को भगवान से भी ज्यादा महत्व देते हैं। वास्तव में सच्चा गुरु ही असली भगवान होता है

हमारे शास्त्र प्रमाणित करते हैं कि पूर्ण परमात्मा स्वयं ही सतगुरु रूप में आते हैं और कर्मकांड में उलझे भोले श्रद्धालुओं को सच्चा ज्ञान देकर सत भक्ति बताते हैं आज के समय में पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज ही है जो कबीर साहेब के अवतार है और कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा है जो हमारे शास्त्र प्रमाणित करते हैं।

Wednesday, June 10, 2020

Bible

पवित्र बाइबल में परमेश्वर का माँस खाने का आदेश नही है।

पवित्र बाइबल-उत्पत्ति 1:29

में परमेश्वर कबीर साहेब जी ने कहा ह की जितने बीज वाले छोटे-छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं वह सब मैंने तुमको तुम्हारे भोजन के लिए दिए हैं।
स्पष्ट है की परमेश्वर ने मनुष्य के खाने के लिए शाकाहारी भोजन दिया।ईसाई भाई मांस खाकर प्रभु के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं।
अतः सभी ईसाई भाइयों से प्रार्थना है की परमेश्वर के आदेश का सही से पालन करें और मांस खाना बंद कर दे।

जिस प्रकार मनुष्य का गला काटने पर उसको जितना दर्द होता है उतना ही दर्द उस पशु को भी होता है जिसका गला कट रहा होता है।यदि किसी इंसान को बोला जाए की आपका गला काटना है तो वह बिल्कुल भी राजी नहीं होगा क्योंकि उसको पता है कि गला काटने से उसको कितना दर्द होगा और उसके जीवन का अंत हो जाएगा तो उसी तरह हमें भी किसी पशु का गला काटने का अधिकार नही है उसको भी बहुत दर्द होता है।
अतः सभी मांसाहारी भाइयों से प्रार्थना है कि वह मांस खाना छोड़ दे और शुद्ध शाकाहारी भोजन खाये

और अधिक जानने के लिए अवश्य देखें संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चैनल पर शाम 7:30 से 

Wednesday, May 6, 2020

तीनो गुण क्या है?

                        तीनो गुण क्या है?

‘‘तीनों गुण रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी, तमगुण शिव जी हैं। ब्रह्म (काल) तथा
प्रकृति (दुर्गा) से उत्पन्न हुए हैं तथा तीनों नाशवान हैं‘‘
प्रमाण :- गीताप्रैस गोरखपुर से प्रकाशित श्री शिव महापुराण जिसके सम्पादक हैं श्री
हनुमान प्रसाद पोद्दार पृष्ठ सं. 110 अध्याय 9 रूद्र संहिता ‘‘इस प्रकार ब्रह्मा-विष्णु तथा शिव तीनों
देवताओं में गुण हैं, परन्तु शिव (ब्रह्म-काल) गुणातीत कहा गया है।
दूसरा प्रमाण :- गीता प्रैस गोरखपुर से प्रकाशित श्रीमद् देवीभागवत पुराण जिसके सम्पादक
हैं श्री हनुमान प्रसाद पौद्दार चिमन लाल गोस्वामी, तीसरा स्कंद, अध्याय 5 पृष्ठ 123 :- भगवान
विष्णु ने दुर्गा की स्तुति की : कहा कि मैं (विष्णु), ब्रह्मा तथा शंकर तुम्हारी कृप्या से विद्यमान हैं।
हमारा तो आविर्भाव (जन्म) तथा तिरोभाव (मृत्यु) होता है। हम नित्य (अविनाशी) नहीं हैं। तुम ही
नित्य हो, जगत् जननी हो, प्रकृति और सनातनी देवी हो। भगवान शंकर ने कहा : यदि भगवान
ब्रह्मा तथा भगवान विष्णु तुम्हीं से उत्पन्न हुए हैं तो उनके बाद उत्पन्न होने वाला मैं तमोगुणी लीला
करने वाला शंकर क्या तुम्हारी संतान नहीं हुआ अर्थात् मुझे भी उत्पन्न करने वाली तुम ही हों। इस

संसार की सृष्टि-स्थिति-संहार में तुम्हारे गुण सदा सर्वदा हैं। इन्हीं तीनों गुणों से उत्पन्न हम,ब्रह्मा-विष्णु तथा शंकर नियमानुसार कार्य में तत्त्पर रहते हैं।उपरोक्त यह विवरण केवल हिन्दी में अनुवादित श्री देवीमहापुराण से है, जिसमें कुछ तथ्योंको छुपाया गया है। इसलिए यही प्रमाण देखें श्री मद्देवीभागवत महापुराण सभाषटिकम्समहात्यम्, खेमराज श्री कृष्ण दास प्रकाश मुम्बई, इसमें संस्कृत सहित हिन्दी अनुवाद किया है।तीसरा स्कंद अध्याय 4 पृष्ठ 10, श्लोक 42 :- ब्रह्मा - अहम् महेश्वरः फिल ते प्रभावात्सर्वे वयं जनि युता न यदा तू नित्याः, के अन्ये सुराःशतमख प्रमुखाः च नित्या नित्या त्वमेव जननी प्रकृतिः पुराणा (42)।हिन्दी अनुवाद :- हे मात! ब्रह्मा, मैं तथा शिव तुम्हारे ही प्रभाव से जन्मवान हैं, नित्य नही हैंअर्थात् हम अविनाशी नहीं हैं, फिर अन्य इन्द्रादि दूसरे देवता किस प्रकार नित्य हो सकते हैं। तुमही अविनाशी हो, प्रकृति तथा सनातनी देवी हो। (42)पृष्ठ 11-12, अध्याय 5, श्लोक 8 :- यदि दयार्द्रमना न सदांऽबिके कथमहं विहितः च तमोगुणःकमलजश्च रजोगुणसंभवः सुविहितः किमु सत्वगुणों हरिः। (8)अनुवाद :- भगवान शंकर बोले :-हे मात! यदि हमारे ऊपर आप दयायुक्त हो तो मुझेतमोगुण क्यों बनाया, कमल से उत्पन्न ब्रह्मा को रजोगुण किस लिए बनाया तथा विष्णु को सतगुणक्यों बनाया? अर्थात् जीवों के जन्म-मृत्यु रूपी कर्म में क्यों लगाया?




Drug free

देवता भी मनुष्य जीवन को तरसते हैं क्योंकि मोक्ष मनुष्य जीवन में ही हो सकता है। और परमात्मा का विधान है कोई भी नशा करने वाला मोक्ष प्राप्त नह...